यह अंगूठी प्राचीन विधि से तैयार की गई है, जो पुराने जहाजों के लोहे के कीलों से बनाई जाती है। इसे बनाने में आग या ताप का उपयोग नहीं किया जाता, जिससे इसकी दिव्य शक्ति और प्रभाव बरकरार रहते हैं। यह अंगूठी शनि की साढ़ेसाती की कृपा प्राप्त करने और उनके दुष्प्रभावों से मुक्ति दिलाने के लिए एक शक्तिशाली उपाय मानी जाती है।
'ॐ शं शनैश्चराय नमः'
शनि ग्रह 29 मार्च के दिन कुंभ राशि से निकलकर मीन राशि में प्रवेश कर जाएंगे। शनि का यह गोचर ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण रहेगा। शनि एकमात्र ग्रह हैं जो राशि परिवर्तन करने के लिए सबसे अधिक ढाई साल का समय लेते हैं। इसलिए मीन में इनके प्रवेश करने के बाद सभी राशियों पर इसका असर देखा जा सकता है। वहीं मीन राशि में बैठकर शनि की दृष्टि वृषभ, कन्या और धनु राशि पर पड़ेगी।
मार्च महीने के आखिरी दो दिन धर्म और ज्योतिष शास्त्र के नजरिए से कई महत्वपूर्ण घटनाएं घटित होंगी।ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शनि को तृतीय, सप्तम और दशम दृष्टियां प्राप्त हैं। यानि जिस भी राशि में ये बैठते हैं वहां से तीसरे, सातवें और दसवें भाव को देखते हैं। ऐसे में मीन राशि में जाने के बाद शनि की तृतीय दृष्टि वृषभ राशि पर, सप्तम दृष्टि कन्या राशि पर और दशम दृष्टि धनु राशि पर होगी।