शनि की साढ़ेसाती या शनि महादशा से है परेशान
- नाव के कील की अंगूठी-है एकमात्र समाधान
Naav Ke kil Ki angoothi
यदि आपकी शनि की साढ़ेसाती या शनि महादशा चल रही है, तो नाव के कील की अंगूठी शनिवार को मध्यमा अंगुली में धारण करें. इससे शनि का प्रकोप कम हो जाएगा.
शनि अपनी प्रिय राशि कुंभ में गोचर कर रहे हैं। इस समय मकर, कुंभ और मीन राशि वालों पर शनि साढ़े साती चल रही है तो कर्क और वृश्चिक राशि वालों पर शनि ढैय्या है।
शनि के कोप से बचने के उपाय
शनि के कोप के कारण व्यक्ति को जीवन में अनेक कष्ट भोगने पड़ते हैं. उसके जीवन में हर समय बाधाएं उत्पन्न होती हैं. लेकिन शनिदेव को प्रसन्न करके उनकी कृपा पा सकते हैं. ज्योतिष शास्त्र में शनि के कोप को शांत करने के कई उपाय बताए गए हैं. – नाव के कील की अंगूठी
नाव के कील की अंगूठी
कौन धारण कर सकता है- नाव के कील की अंगूठी
यदि आपकी राशि में शनि अथवा राहु आ रहा है तो नांव के कील की अंगूठी धारण कर सकते हैं।
अगर आप साढ़ेसाती से ग्रस्त हो तो नांव के कील की अंगूठी धारण कर सकते हैं।
यदि आपकी राशि का अढैया चल रहा हो नांव के कील की अंगूठी धारण कर सकते हैं।
यदि आप शनि दृष्टि से ग्रस्त एवं पीड़ित हो तो नांव के कील की अंगूठी धारण कर सकते हैं।
यदि आप कारखाना, लोहे से संबद्ध उद्योग, ट्रेवल, ट्रक, ट्रांसपोर्ट, तेल, पेट्रोलियम, मेडिकल, प्रेस, कोर्ट-कचहरी से संबंधित हो नांव के कील की अंगूठी धारण कर सकते हैं।
यदि आप कोई भी अच्छा कार्य करते हो तो नांव के कील की अंगूठी धारण कर सकते हैं।
अगर आप असाध्य रोग कैंसर, एड्स, कुष्ठरोग, किडनी, लकवा, साइटिका, हृदयरोग, मधुमेह, खाज-खुजली जैसे त्वचा रोग से ग्रस्त तथा पीड़ित हो तो आप श्री शनिदेव के नांव के कील की अंगूठी धारण अवश्य कीजिए।
जो व्यक्ति बीमारी से ग्रसित हैं या जिन्हें बार-बार वाहन दुर्घटना का सामना करना पड़ रहा हैं, तो उन्हें नांव के कील की अंगूठी धारण करनी चाहिए, इससे रोग और दुर्घटना से निजात मिलेगी।
जिन जातकों को कड़ी मेहनत के बाद भी मनवांछित फल प्राप्त नहीं हो रहे हैं, उन्हें नांव के कील की अंगूठी धारण करना चाहिए तथा हर शनिवार अपने शरीर पर तेल की मालिश करनी चाहिए। इससे स्वास्थ्य लाभ के साथ-साथ रुके हुए काम भी बनने लगते हैं।
यदि आपकी कुंडली मे राहु अथवा केतु नीच राशि मे है, अशुभ स्थिति मे है तो राहु केतु की दशा अंतर दशा मे आपको नांव के कील की अंगूठी अवश्य धारण करना चाहिए।
नाव के कील की अंगूठी की विशेषता
इस नाव की कील की अंगूठी को शनिवार या शनि जयंती अथवा शनि अमावस्या तथा अन्य विशिष्ट तिथियों के विशेष ऊर्जा काल के दिन बिना अग्नि मे तपाये बनाई जाती है।
इसे तिल्ली के तेल में 41 दिन शनिवार से शनिवार तक रखा जाता है तथा उस पर शनि मंत्र के 23,000 जाप से अभिमांत्रित सिद्ध तथा प्राण प्रतिष्ठित करके भेजा जाता है।
नाव की कील के फायदे बहुत है, कहने का तात्पर्य यह है की आप अगर कोई रत्न खरीदते हो तो एक तो वो इतने महंगे होते की आपका खरीदना मुस्किल हो जाता है , दूसरा उसका फायदे के साथ साथ नुकसान भी होना तय है, क्योंकि कभी रत्न गलत या कभी कुंडली देखने वाला ज्योतिष गलत, तो कभी रत्न आपको सूट नहीं किया तो दिक्कत |
जो फायदा एक नीलम रत्न आपको देता है ना उसी तरह नाव की कील की अंगूठी आपको फायदा पहुंचाती है, नीलम आपको नुकसान भी पहुंचा सकती है ,लेकिन नाव की कील की अंगूठी आपको नुकसान नहीं पहुंचाती |
नाव के कील की अंगूठी कैसे करें धारण?
नाव की कील से बनी हुई अंगूठी शनिवार के अवाला किसी और दिन ले आएं। फिर इसको शनिवार की सुबह एक कटोरी में सरसों का तेल डालकर उसमें इसको डुबाकर करके रख दें। फिर शाम के समय इसको निकालकर जल से धोकर शुद्ध कर लें। इसके बाद इसे अपने सामने रखकर ओम् शं शनैश्चराय नमः मंत्र का 108 बार जाप करें। इसके बाद, पुरुष इसे दाहिने तथा स्त्रियाँ बाएं हाथ की बीच वाली उंगली में धारण करें। ऐसा करने के बाद शनि की पीड़ा का असर खत्म होना शुरू हो जाएगा।
मेरा व्यक्तिगत अनुभव 35 सालों का रहा है कोई भी व्यक्ति के जीवन में नाव की कील से बनी अंगूठी अगर फायदा नहीं करती है तो नुकसान भी नहीं करती है। हां इतना जरूर है की जिन लोगों की कुंडली में शनि उच्च का हो तो उनको अवश्य पहनना चाहिए। इसके अलावा मकर, कुंभ राशि के लोगों के लिए विशेष फायदे के लिए नाव की कील से बनी अंगूठी पहन सकते है।