Shani Dosha Nivaran, Saturn Remedies in Vedic Astrology,Shani Grah Shanti Upay, Astrological Remedies for Shani Transit, Shani Shanti Puja Vidhi, Shani Graha Dosh Nivarana Mantra, Shani Upay for Success, Shani Sade Sati Remedies, Shani Peyarchi Dosha Nivaran, Shani Deva Ke Upay, Saturn Transit Remedies, Shani Dosh Ke Totke, Shani Grah Shanti Yantra, Navagraha Shanti Puja for Shani, Shani Pradosh Vrat Vidhi, Shani Amavasya Upay, Shani Deva Ke Beej Mantra, Shani Gochar Ke Upay, Shani Shanti Kavach, Saturn Transit and Spiritual Remedies

नाव के कील की अंगूठी-शनि गोचर २०२४, शनि की साढ़ेसाती या शनि महादशा से है परेशान – naav ke keel ki angoothi

naav ke keel ki angoothi
है एकमात्र समाधान

naav ke keel ki angoothi यदि आपकी शनि की साढ़ेसाती या शनि महादशा चल रही है, तो नाव के कील की अंगूठी शनिवार को मध्यमा अंगुली में धारण करें. इससे शनि का प्रकोप कम हो जाएगा.

 

शनि अपनी प्रिय राशि कुंभ में गोचर कर रहे हैं। इस समय मकर, कुंभ और मीन राशि वालों पर शनि साढ़े साती चल रही है तो कर्क और वृश्चिक राशि वालों पर शनि ढैय्या है।

 

शनि के कोप से बचने के उपाय

शनि के कोप के कारण व्यक्ति को जीवन में अनेक कष्ट भोगने पड़ते हैं. उसके जीवन में हर समय बाधाएं उत्पन्न होती हैं. लेकिन शनिदेव को प्रसन्न करके उनकी कृपा पा सकते हैं. ज्योतिष शास्त्र में शनि के कोप को शांत करने के कई उपाय बताए गए हैं.

 

उनमे से बेहद लाभकारी और कम खर्चीला उपाय है –

 
 

नाव की कील की अंगूठी का रहस्य ।

# Saturday# ghode ki naal# naav ki kil# horseshoe# boat tack# shani ka upay# shani dev# main gate vastu# jyotish# astrology# Metal Black Horse Nal

 

naav ke keel ki angoothiज्योतिष शास्त्र में शनि देव को क्रूर ग्रह माना जाता है, इसकी स्थिति से किसी भी व्यक्ति का पूरा जीवन प्रभावित होता है। शनि को न्यायाधिश का पद प्राप्त है। यह हमें हमारे कर्मों का फल प्रदान करता है। जिस व्यक्ति के जैसे कर्म होते हैं उसी के अनुसार उन्हें फल की प्राप्ति होती है। शनि साढ़ेसाती और ढैय्या के समय सबसे अधिक प्रभावी होता है।

 

सामान्यत: साढ़ेसाती और ढैय्या के समय अधिकांश व्यक्तियों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इनसे बचने के लिए सबसे जरूरी है कि शनि देव की आराधना और धार्मिक कर्म करें।

 

शनि कृपा प्राप्ति के लिए एक सटिक उपाय बताया गया है नाव की कील। नाव की कील का छल्ला बनवाकर इसे मिडिल फिंगर में शनिवार के दिन पहनें। यह एक सटिक उपाय है। नाव की कील धारण करने से शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या में शुभ परिणाम प्राप्त होते हैं। बिगड़े कार्य स्वत: ही बन जाते हैं। सभी परिणाम आपके पक्ष में आने लगते हैं।

 

लोहे की कील शनि की है । और जब यही कील नाव में लग जाती है तो कुछ और बन जाती है ।

 

चंद्र के पानी पर यह नाव तैरती है।

 

मंगल के कटाव बहाव को चीरती आगे बढ़ती है ।

 

शुक्र के त्रिकोण होते है नाव और कील में ।

 

और राहु । राहु का ही तो है यह सारा समन्दर और जलीय जीव ।

 

नाव के कील की अंगूठी का प्रभाव राहु की तरह बेहद असर कारक है ।

 

नीलम भी इसके आगे कुछ नहीं ।

 

पर इसको निर्माण और धारण करने के कुछ तरीके है । और जब यह सही ढंग से तैयार हो जाती है तो शुरुआत हो जाती है अप्रत्याशित सफलताएं और आश्चर्य जनक रूप से हर मुसीबत , किसी भी मुसीबत से छुटकारा ।

 

क्योंकि यह राहु और शनि की कुछ विशेष प्रिय वस्तुओ में से है ।

 

इस नाव की कील की अंगूठी शनिवार या शनि जयंती अथवा शनि अमावस्या के विशेष ऊर्जा काल के दिन बिना अग्नि मे तपाये बनाई जाती है।

 

इसे तिल्ली के तेल में 7 दिन शनिवार से शनिवार तक रखा जाता है तथा उस पर शनि मंत्र के 23,000 जाप से सिद्ध तथा प्राण प्रतिष्ठित करके भेजा जाता है।

 

शनिवार के दिन शाम के समय इसे धारण करें। यह अंगूठी मध्यमा (शनि की अंगुली) में ही पहनें तथा इसके लिए पुष्य, अनुराधा, उत्तरा, भाद्रपद एवं रोहिणी नक्षत्र सर्वश्रेष्ठ हैं।

 

धारण करने के बाद किसी भी माला से नीचे लिखे किसी एक मंत्र की कम से कम 5 माला जप करें तथा शनिदेव से सुख-संपत्ति के लिए प्रार्थना करें। यदि प्रत्येक शनिवार को इस मंत्र का इसी विधि से जप करेंगे तो शीघ्र लाभ होगा।

 

मंत्र –

पौराणिक शनि मंत्र: 

ॐ ह्रिं नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम।

 छाया मार्तण्डसम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम् ।।

 

क्योंकि यह राहु और शनि की कुछ विशेष प्रिय वस्तुओ में से है यदि आपकी कुंडली मे राहु  अथवा केतु नीच राशि मे है, अशुभ स्थिति मे है तो राह केतु की दशा अंतर दशा मे आपको नांव के कील की अंगूठी अवश्य धारण करना चाहिए

 

 हमारे संस्थान से संपूर्ण वैदिक विधि विधान से तैयार “सिद्ध प्राणप्रतिष्ठित नांव की कील की अंगूठी”प्राप्त कर सकते है।संपर्क 7620314972

India Astrology Foundation.

ज्योतिर्विद श्यामा गुरुदेव

Thanks for your interest in the  “सिद्ध प्राणप्रतिष्ठित नांव की कील की अंगूठी”but before you purchase and use it, It is utmost important to check the compatibility of the ring with your Rashi and Nakshatra. hence we request you to kindly send us the following details first. 

 

1) Your Full Name________

2) Date of Birth________

3)Time of Birth_________

4) Place of Birth__________

 

so that we check your compatibility and suggest whether this ring will be fortunate /beneficial for your Rashi or not. because Gurudev doesnt believe in just selling things unless they are beneficial to the purchaser.

 

Please share the above Birth details to Our Whatsapp Number 7397902019 or click here to connect 

यदि आपकी भी मकर, कुंभ, मीन राशि है अथवा शनि, राहु या केतु की महादशा, अंतर्दशा चल रही है तो
आज ही ऑर्डर करें

 

 पवित्र नदी गंगा में नाव से उतारी गई कील से बनी यह अंगूठी हम प्रदान करते हैं। हम यह सुनिश्चित करते हैं कि अंगूठी इस तरह से बनाई जाए कि इसे पहनना आसान हो जाए और यह कुछ ही समय में खराब न हो। इसके अलावा, हम इसमें कोई विशेष लेप नहीं लगाते हैं, लेकिन इस्तेमाल की गई कील अच्छी गुणवत्ता वाली होती है और इसलिए यह रोजाना पहनने पर भी सड़ेगी या जंग नहीं लगेगी और पानी के लगातार संपर्क में रहने से भी खराब नहीं होगी । 

उद्देश्य:  शनि की साढ़े साती, शनि ढैय्या या शनि के अन्य बुरे प्रभाव से बचने के लिए
इण्डिया एस्ट्रोलॉजी फाउंडेशन गारंटी:  100% असली एवं विश्वसनीय
दैवीय प्रतीक: शनि देव
स्थान:  दायें हाथ की मध्यिका उंगली में धारण करें.

4 thoughts on “नाव के कील की अंगूठी-शनि गोचर २०२४, शनि की साढ़ेसाती या शनि महादशा से है परेशान – naav ke keel ki angoothi”

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *